Monday, October 18, 2021
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देशभक्त vs देशद्रोही कोरोना काल में सच्ची देशभक्ति क्या है?

भारत के द्वितीय मगर अद्वितीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने एक बार कहा था कि प्रत्येक वह व्यक्ति चाहे वह मजदुर, किसान, इंजीनियर, विद्यार्थी या एक रिक्शा चालक ही क्यों न हो, अगर वह अपना कार्य पूरी निष्ठा, लगन तथा ईमानदारी से करता है तो वह भी उतना ही सच्चा देशभक्त है जितना की अपनी जान पर खेलकर देश के सीमाओं की रक

हमारा प्यार देश भारत ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व Covid 19 वायरस से उत्पन्न होने वाली कोरोना नामक महामारी के कारण एमरजेंसी जैसे हालात से गुजर रहा है. दिन प्रतिदिन कोरोना के बढ़ते आंकड़े भविष्य की भयावह तस्वीर पेश कर रहे हैं।

आकस्मिक जैसे हालात सलिए कि पहले से कोई भी इसके लिए कहीं से तैयार नहीं था. पहले से इस तरह की बीमारी का कोई अनुमान नही था. न सरकारों को, न वैज्ञानिकों को, न ही बिमारियों और महामारियों पर कई दसकों से कार्य कर रही WHO जैसी बड़ी स्वास्थ्य संस्थाओं को. और इसलिए इस पर कोई तैयारी भी नहीं थी.

हमसब को अचानक ही एक ऐसे दुश्मन से लड़ना पड़ रहा है. जिसके बारे में न तो हमने पहले कभी सुना था, न पढ़ा था, न ही कुछ जानते थे.

ँखों से देखने की बात एक तरफ रहने दीजिये, प्रयोगशालाओं में इस्तेमाल किये जाने वाले सामान्य माइक्रोस्कोप से भी इसे अर्थात COVID19 विरुसको देख पाना असंभव है. एक तरीके से कह सकते है कि वह हमारे आसपास हो, हमारे चारों तरफ हो, पर हम उसे देख नहीं सकते, हमारे लिए वह  अदृश्य है. हम, हमारा देश और समूर्ण विश्व इस अदृश्य और कहीं भी मौजूद रह सकने वाले इस शत्रु से लड़ रहा है.

मानव सभ्यता के ज्ञात इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ था. एक समय में प्लेग और हैजा जैसी महामारी से गाँव के गाँव कल के गल में समा जाते थे. प्लेग ने योरोप की आबादी के बड़े हिसे को ख़त्म कर दिया था. पर कोई अध्याय ऐसा नहीं मिलता कि ट्रांसपोर्ट, बसें, ट्रेन तथा हवाई यातायात सेवाए इस प्रकार से बड़े पैमाने पर बंद की गई हों जैसा की आजकल हो रहा है.

कारण है इस सबका

यह कोरोना नामक बीमारी, कोरोना नाम का शत्रु इन सब में कुछ अलग है.

कैसे फैलता है? और कैसे बचें? यह सब हम सभी अख़बार, टेलीविजन और अन्य माध्यमो से काफी कुछ सुन चुके हैं.

हम तो बात कर रहे हैं इस कोरोना काल की संकट की घड़ी में सच्ची देशभक्ति की

और आप कहेंगे कि देशभक्ति के मामले में भी आप कोरोना को क्यों घुसेड रहे हैं.

तो मित्रों अभी भी वक्त है कि जान लीजिये और जाग जाइये.

कोरोना संकट के समय में हम सबका

आम हों या ख़ास क्या कर्तव्य है?

क्या धर्म है?

और इस बुरे वक्त में हम कैसे देश की सच्ची सेवा कर सकते हैं कैसे देश भक्ति कर सकते हैं?

  • यह बीमारी जैसी भी आई है अब तो आ गई ही है तो इतनी आसानी से नहीं जाएगी और चली भी गई तो इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि ऐसी कोई दूसरी बीमारी दोबारा तिबारा नहीं आएगी.
  • इसलिए हमसब का यह दाइत्व है कि अपनी आदतों को समय रहते बदल लें. हालांकि यह अच्छी तरह पता है की सदियों से बनाये नियम जिसमे हमसभी रहते चले आ रहे हैं, उन्हें बदलना आसन नहीं है. पर ये वक्त है बदलने का क्योंकि जो स्वयं नहीं बदलते ऐसे बड़े बड़े टेढो को समय बदलने पर मजबूर करके बदल ही देता है.
  • याद रखिये डायनासोर कितने बड़े और बलशाली थे एक झटके में उनका अस्तित्व ख़त्म हों गया इस धरती से.
  • धरती के निर्माण से अबतक न जाने कितने जीव जंतु और सभ्यताएं पनपी और विलुप्त हों गई हैं.
  • मिस्र के पिरामिड निर्माताओं से लेकर हड़प्पा तक के विकसित सभ्यताओं का अब कोई अतापता नहीं.
  • तो कोरोना हमारे लिए बीमारी नहीं. सच मानो तो एक अलार्म हों सकता है इस बात का कि भविष्य के गर्भ में मानव का वजूद कैसा होगा .
  • अगर इन्सान को जिन्दा रहना है तो बदलना होगा.
  • घबराएँ नहीं, जान और समझ लें कि परिवर्तन ही संसार का नियम है. और परिवर्तन अर्थात बदलाव के लिए तैयार हो जाएं।

एक पुराना शेर याद आता है-

अभी भी वक्त है संभल जा ये हिन्दोस्तां वालों

तेरी बरबादियों के मशवरे आज भी है आसमानों में.

और मित्रों ऊपर में हमने देशभक्ति की बात की थी तो एक सच्चे देशभक्त के रूप में सिर्फ इस बात का ध्यान रखें कि-

  • सरकार और स्वस्थ विभाग द्वारा जारी किये गए निर्देशों का कड़ाई से पालन करें.
  • समय समय पर हाथों को सेनेटाइज करे और साबुन से धोएं।
  • बेवजह किसी के यहाँ या इधर उधर घूमना या आना जाना नही करें।
  • सामाजिक दुरी के नियम का यथा संभव पालन करें. यकीन मानिये यह सब आपके और सबके हक़ में है.
  • आप जहाँ भी हैं, जो भी हैं, जो कुछ भी करते हैं, अपना कम पूरी लगन, निष्ठा और ईमानदारी से करें.
  • प्रतिदिन एक जरूरतमंद की मदद करें.
  • प्रतिदिन किसी एक भूखे को खाना खिलाएं.
  • सक्षम हैं तो थोड़े पैसों से भी किसी की मदद करें.
  • आप जिस कम में भी पारंगत हैं वह दूसरों को सिखाएं.
  • अगर आपके पास कोई सही जानकारी है तो शेयर करें.
  • अगर आप विद्यार्थी, शिक्षक या सेवानिवृत हैं तो थोडा समय निकलकर गरीब बच्चों को पढ़ायें. यकीन मानिये यह करके आपको जो सुकून और इज्जत मिलेगी , वह अरबों खरबों की दौलत जमा करके नहीं मिल सकता.

लेकिन यह हमें अच्छी तरह पता है कि हमारे देशवासी एक बार जाग गए तो फिर यह कोरोना क्या ऐसे किसी भी विपति में एक दुसरे का हाथ थामकर उबरना और उबारना हमें अच्छी तरह आता है.

और हमें पूरा विश्वास है

कोरोना हारेगा, मानवता जीतेगी.

तो जहाँ भी हों अपना खयाल रखें

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